जायद खान मां ज़रीन खान अंतिम संस्कार | ज़रीन खान हिंदू रीति से अंतिम संस्कार | जायद खान ट्रोलिंग पर जवाब
जायद खान ने मां ज़रीन खान के अंतिम संस्कार पर चुप्पी तोड़ी: मां की आखिरी इच्छा का सम्मान किया
हेलो दोस्तों, पिछले साल नवंबर में बॉलीवुड के दिग्गज अभिनेता संजय खान की पत्नी और जायद खान की मां ज़रीन खान का 81 साल की उम्र में निधन हो गया था. उनका निधन लंबी बीमारी के बाद मुंबई में हुआ. लेकिन उनकी अंतिम विदाई ने सोशल मीडिया पर काफी बहस छेड़ दी.

जायद खान ने अपनी मां का अंतिम संस्कार हिंदू रीति-रिवाजों से किया. श्मशान में चिता जलाई गई और अस्थियों को पवित्र नदी में विसर्जित करने की बात कही गई. कुछ लोगों ने इस पर सवाल उठाए और जायद खान को ट्रोल भी किया. अब जायद खान ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ दी है और सच्चाई सामने रखी है.
जायद खान ने क्या कहा? मां की आखिरी इच्छा का खुलासा
हाल ही में एक इंटरव्यू में जायद खान ने भावुक होकर बताया कि यह उनकी मां ज़रीन खान की आखिरी इच्छा थी. उन्होंने कहा, मां चाहती थीं कि उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीति से हो और उनकी अस्थियों को नदी में प्रवाहित किया जाए ताकि उन्हें मुक्ति मिले.
जायद खान ने आगे जोड़ा, एक बेटे के नाते मेरा सबसे बड़ा धर्म अपनी मां की आखिरी इच्छा पूरी करना है. समाज के डर से या किसी की बात सुनकर नहीं, बल्कि मां की खुशी के लिए. हमारा परिवार बहुत सेकुलर है. हम इंसानियत को सबसे बड़ा धर्म मानते हैं. धर्म व्यक्तिगत बात है, इसे बेहतर या बुरा नहीं कहना चाहिए.
यह सुनकर दिल छू गया. मां-बेटे का रिश्ता कितना पवित्र होता है, यह उदाहरण साफ दिखाता है. जायद खान ने कहा कि हालात ऐसे हैं कि लोग नफरत फैलाते हैं, लेकिन उन्हें इसकी परवाह नहीं. वे अपनी मां के सम्मान में जो सही लगा, वह किया.
ज़रीन खान का परिवार और बैकग्राउंड
ज़रीन खान पारसी मूल की थीं. उन्होंने संजय खान से शादी की, जो मुस्लिम परिवार से हैं. उनके दो बच्चे हैं, जायद खान और सुजैन खान (जो ऋतिक रोशन की पूर्व पत्नी हैं). ज़रीन खान खुद 1963 में फिल्म तेरे घर के सामने, में देव आनंद के साथ काम कर चुकी थीं.
परिवार हमेशा से धर्मनिरपेक्ष विचारों वाला रहा है. जायद खान ने साफ कहा कि उनके घर में किसी एक धर्म को ऊंचा या नीचा नहीं माना जाता, इंसानियत सबसे ऊपर है.
सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी बहस?
अंतिम संस्कार के वीडियो वायरल होने के बाद कुछ लोग पूछने लगे, मुस्लिम परिवार में हिंदू रीति से अंतिम संस्कार क्यों? लेकिन जायद खान का जवाब बहुत सीधा और मजबूत है, मां की इच्छा थी.
कई सेलिब्रिटी भी अंतिम संस्कार में शामिल हुए थे, जैसे ऋतिक रोशन, सबा आजाद, बॉबी देओल और काजोल आदि, पूरा परिवार एकजुट रहा.
मां की इच्छा का सम्मान क्यों जरूरी?
हमारे भारतीय संस्कार में मां-बाप की आखिरी इच्छा को पूरा करना सबसे बड़ा पुण्य माना जाता है. जायद खान ने यही किया, चाहे कोई कितना भी ट्रोल करे, बेटे ने मां के लिए सही फैसला लिया.
यह घटना हमें सिखाती है कि धर्म से ऊपर इंसानियत है. हर परिवार अलग-अलग मान्यताएं रखता है. हमें दूसरों के निजी फैसलों पर अनावश्यक सवाल नहीं उठाने चाहिए.
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दोस्तों, आप क्या सोचते हैं? क्या बेटे को मां की आखिरी इच्छा पूरी करनी चाहिए, भले ही समाज कुछ भी कहे? कमेंट में अपनी राय जरूर बताएं.
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