सिंगापुर में India Energy Showcase में पेट्रोलियम मंत्रालय ने भारत के oil and gas investment opportunities
सिंगापुर में India Energy Showcase में पेट्रोलियम मंत्रालय ने भारत के oil and gas investment opportunities, Samudra Manthan मिशन और तेजी से बढ़ती energy demand पर चर्चा की, जानें कैसे विदेशी कंपनियां इसमें हिस्सा ले सकती हैं.
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सिंगापुर में India Energy Showcase: भारत के तेल एवं गैस क्षेत्र में भारी निवेश के अवसर

दोस्तों, ऊर्जा की बात जब निकलती है तो सिर्फ पेट्रोल-डीजल की कीमतें याद आती हैं. लेकिन असल खेल उससे कहीं बड़ा है, सोमवार को सिंगापुर में हुए India Energy Showcase में वैश्विक ऊर्जा कंपनियों और निवेशकों ने भारत के तेल और गैस सेक्टर में मौजूद अरबों डॉलर के मौकों पर गौर किया.
पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव नीरज मित्तल की अध्यक्षता में हुए इस कार्यक्रम ने साफ संदेश दिया—भारत अब सिर्फ आयातक नहीं, बल्कि बड़ा निवेश गंतव्य बन रहा है.
भारत की ऊर्जा मांग क्यों है इतनी खास?
भारत की ऊर्जा मांग वैश्विक औसत से तीन से चार गुना तेज गति से बढ़ रही है. यह तथ्य अकेले ही निवेशकों को आकर्षित करने के लिए काफी है. मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया कि पूरी वैल्यू चेन—exploration से लेकर refining, petrochemicals, gas infrastructure और strategic storage तक—में बड़े अवसर मौजूद हैं.
Make in India के तहत विनिर्माण और घरेलू उत्पादन बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया. इससे न सिर्फ रोजगार बढ़ेंगे, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा भी मजबूत होगी.
Samudra Manthan: अपतटीय अन्वेषण का बड़ा मिशन
कार्यक्रम की सबसे बड़ी चर्चा Samudra Manthan National Offshore Exploration Mission पर केंद्रित रही. कैबिनेट ने 31 जुलाई 2026 को इस मिशन को मंजूरी दी थी. वित्त वर्ष 2030-31 तक इसमें 8.85 अरब अमेरिकी डॉलर खर्च किए जाएंगे.
हाइड्रोकार्बन महानिदेशालय (DGH) के महानिदेशक श्रीकांत नागुलापल्ली ने बताया कि भारत की हाइड्रोकार्बन क्षमता बहुत बड़ी है. सरकार अन्वेषण संबंधी सुधारों के जरिए विदेशी कंपनियों के लिए रास्ता आसान बना रही है. इक्विटी निवेश, संयुक्त उपक्रम, तकनीकी साझेदारी और लंबी अवधि के आपूर्ति समझौते—ये सभी विकल्प खुले हैं.
BP ग्रुप का अनुभव और India Energy Week 2027
कार्यक्रम में BP ग्रुप ने भारत में अपने अनुभव साझा किए. साथ ही India Energy Week 2027 की भी जानकारी दी गई. सिंगापुर में भारत की उप उच्चायुक्त सुधि चौधरी ने दोनों देशों के बीच ऊर्जा सहयोग को और मजबूत करने की बात कही.
पेट्रोलियम मंत्रालय के संयुक्त सचिव (अन्वेषण) विनोद शेषन समेत वरिष्ठ अधिकारियों ने भी हिस्सा लिया.
निवेशकों के लिए क्या है खास?
- अपतटीय (offshore) अन्वेषण और उत्पादन
- रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल्स
- गैस इन्फ्रास्ट्रक्चर
- रणनीतिक भंडारण
- Make in India के तहत उपकरण निर्माण
सरकार लगातार नियामकीय सुधार कर रही है ताकि निवेशक सहज महसूस करें. घरेलू उत्पादन बढ़ाकर आयात निर्भरता कम करना मुख्य लक्ष्य है.
निष्कर्ष: सहयोग और संवाद जारी रहे
कार्यक्रम का समापन सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ ऊर्जा भविष्य के लिए निरंतर सहयोग पर जोर देते हुए हुआ. भारत वैश्विक ऊर्जा कंपनियों के साथ साझेदारी बढ़ाने के लिए पूरी तरह तैयार है.
अगर आप ऊर्जा क्षेत्र से जुड़े हैं या निवेश की योजना बना रहे हैं, तो यह मौका नजरअंदाज न करें. भारत की ऊर्जा कहानी अब सिर्फ घरेलू नहीं, वैश्विक स्तर पर लिखी जा रही है.
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