Mutual Fund Investment में High Returns के पीछे भागना क्यों खतरनाक? Radhika Gupta का जरूरी Advice
क्या आप भी Mutual Funds में सिर्फ High Returns देखकर फंड बदल रहे हैं? Edelweiss Mutual Fund की MD Radhika Gupta बता रही हैं कि ये आदत आपको महंगा पड़ सकती है, जानिए सही तरीका.
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नमस्ते दोस्तों, आज मैं आपसे एक ऐसी बात करना चाहता हूँ जो लगभग हर Mutual Fund निवेशक के साथ होती है. हम सब शुरुआत में साफ लक्ष्य लेकर आते हैं—रिटायरमेंट के लिए पैसा जमा करना, बच्चे की पढ़ाई का खर्च निकालना या महंगाई से ज्यादा रिटर्न कमाना. लेकिन कुछ समय बाद क्या होता है? हम किसी और फंड का 25-30% रिटर्न देख लेते हैं और सोचने लगते हैं— मेरे फंड ने इतना क्यों नहीं दिया?
यही सोच हमें High Returns के पीछे भागने पर मजबूर कर देती है, और यही गलती अक्सर महंगी साबित होती है.
क्यों High Returns का पीछा करना Risky है?
Edelweiss Mutual Fund की MD और CEO राधिका गुप्ता ने हाल ही में इस व्यवहार पर बहुत साफ बात कही है. उन्होंने बताया कि ज्यादातर निवेशक एक निश्चित लक्ष्य के साथ शुरू करते हैं, जैसे मुझे 10% रिटर्न चाहिए या मेरे पैसे को महंगाई से आगे बढ़ाना है.
समस्या तब शुरू होती है जब आपका फंड ठीक-ठाक रिटर्न दे रहा होता है, लेकिन कोई दूसरा फंड पिछले 1-2 साल में ज्यादा कमाकर दिखाता है. तभी दिमाग में सवाल आता है— मुझे उतना क्यों नहीं मिल रहा?
राधिका गुप्ता कहती हैं कि इस पल पूर्ण रिटर्न सापेक्ष हो जाता है. यानी आप अपने लक्ष्य से संतुष्ट रहने के बजाय दूसरों से तुलना करने लगते हैं.
याद रखें—जो फंड किसी खास सेक्टर या मार्केट के एक हिस्से की तेजी से ऊँचा रिटर्न दे रहा है, जरूरी नहीं कि वो अगले चक्र में भी वैसा ही करे. ज्यादा रिटर्न अक्सर ज्यादा जोखिम के साथ आता है. बड़ा दांव, अस्थिर सेगमेंट में ज्यादा निवेश या छिपा हुआ रिस्क—ये सब बाद में नुकसान भी करा सकते हैं. बाजार में शायद ही कुछ मुफ्त मिलता है.
बार-बार फंड बदलने का नुकसान
हर बार फंड बदलने पर आप गलत समय चुनने का जोखिम उठाते हैं. अक्सर निवेशक कमजोर प्रदर्शन के बाद बेच देते हैं और फिर वो फंड ऊपर चला जाता है. नए फंड में हालिया तेजी का बड़ा हिस्सा पहले ही निकल चुका होता है, नतीजा? High पर खरीदना और Low पर बेचना.
लंबी अवधि का लक्ष्य (जैसे रिटायरमेंट) हर साल टॉप परफॉर्मर चुनने से पूरा नहीं होता पूरा पोर्टफोलियो सही दिशा में होना चाहिए.
निवेशकों को क्या करना चाहिए? (Practical Tips)
राधिका गुप्ता का साफ संदेश है—अच्छा निवेश हर साल सबसे ज्यादा रिटर्न वाला फंड चुनना नहीं है. ऐसी रणनीति चुनें जिस पर आप लंबे समय तक टिक सकें और जो आपके लक्ष्य तक पहुँचाए.
फंड बदलने से पहले ये सवाल जरूर पूछें:
- क्या मेरा लक्ष्य या निवेश अवधि बदल गई है?
- क्या फंड की रणनीति बदल गई है?
- क्या कमजोर प्रदर्शन अस्थायी है या लगातार?
- क्या नया फंड सिर्फ हाई रिटर्न की वजह से चुन रहा हूँ
- या वो मेरे पोर्टफोलियो के लिए बेहतर है?
- क्या नया फंड ज्यादा जोखिम वाला है?
अगर फंड लगातार बेंचमार्क से पीछे है और कोई ठोस वजह नहीं है, तो समीक्षा जरूर करें. लेकिन सिर्फ दूसरे ने ज्यादा दिया, वाली सोच से बचें.
निष्कर्ष: धैर्य ही असली रिटर्न है
मित्रों, Mutual Fund Investment में सबसे बड़ा नुकसान अक्सर खराब प्रदर्शन से नहीं, बल्कि लगातार बेहतर प्रदर्शन की तलाश में घूमते रहने से होता है. अपना लक्ष्य याद रखें, जोखिम समझें और लंबे समय तक टिके रहें.
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