अफोर्डेबल हाउसिंग में बड़ी राहत: क्रेडिट रिस्क गारंटी लिमिट 20 से 40 लाख रुपये होने वाली, होम लोन आसान होगा

अफोर्डेबल हाउसिंग में बड़ी राहत: क्रेडिट रिस्क गारंटी लिमिट 20 से 40 लाख रुपये होने वाली

अगर आप भी सस्ता घर खरीदने का सपना देख रहे हैं तो ये खबर आपके लिए है. सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी लिमिट को दोगुना करके 40 लाख रुपये करने पर विचार कर रही है. जानिए इससे होम लोन, HFC और घर खरीदारों को क्या फायदा होगा.

अफोर्डेबल हाउसिंग में बड़ी राहत

क्या हो रही है बड़ी तैयारी?

मध्यम और निम्न आय वर्ग के लोगों के लिए अच्छी खबर आ रही है. सूत्रों के मुताबिक केंद्र सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग के लिए क्रेडिट रिस्क गारंटी की सीमा मौजूदा 20 लाख रुपये से बढ़ाकर 40 लाख रुपये करने पर गंभीरता से विचार कर रही है.

वित्त मंत्रालय और आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय के बीच इस मुद्दे पर कई बैठकें हो चुकी हैं, वजह साफ है – पिछले कुछ सालों में जमीन, सीमेंट, स्टील और मजदूरी की कीमतें इतनी बढ़ गई हैं कि 20 लाख रुपये में अच्छा किफायती मकान मिलना मुश्किल हो गया है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी 1-BHK और 2-BHK फ्लैट्स की कीमत 30 से 45 लाख रुपये के आसपास पहुंच गई है.

क्रेडिट रिस्क गारंटी क्या होती है और क्यों जरूरी है?

सरल भाषा में समझें तो यह सरकार का एक सुरक्षा कवच है. बैंक या हाउसिंग फाइनेंस कंपनी (HFC) अगर किसी कम आय वाले व्यक्ति को होम लोन देती है और वह व्यक्ति लोन नहीं चुका पाता, तो नुकसान का एक हिस्सा सरकारी फंड से भरा जाता है.

इससे बैंक और HFC बिना ज्यादा डर के असंगठित क्षेत्र या स्वरोजगार वाले लोगों को भी लोन आसानी से मंजूर कर देते हैं. कोलेटरल की जरूरत भी कम हो जाती है, नतीजा – होम लोन पास होने की संभावना बढ़ जाती है.

लिमिट बढ़ाने के पीछे मुख्य कारण

  • मकानों की कीमतों में भारी उछाल
  • पुरानी 20 लाख की सीमा अब प्रासंगिक नहीं रही
  • बैंक और HFC को बड़े टिकट साइज के अफोर्डेबल प्रोजेक्ट्स के लिए फंड जारी करने में आसानी

साथ ही, वर्तमान में क्रेडिट गारंटी फंड ट्रस्ट फॉर अफोर्डेबल हाउसिंग का कॉर्पस करीब 3,000 करोड़ रुपये का है. लिमिट दोगुनी होने पर इस फंड का आकार भी बढ़ाने की जरूरत पड़ेगी, ताकि ज्यादा से ज्यादा घर खरीदारों को कवर किया जा सके.

HFC और रियल एस्टेट पर क्या असर पड़ेगा?

छोटी और मझोली हाउसिंग फाइनेंस कंपनियां, जो टियर-2 और टियर-3 शहरों में काम करती हैं, उन्हें सबसे ज्यादा फायदा होगा. उनका जोखिम कम होगा और वे बिना NPA के डर के ज्यादा लोन बांट सकेंगी.

डेवलपर्स के अटके अफोर्डेबल प्रोजेक्ट्स की बिक्री भी तेज हो सकती है. स्वरोजगार वाले छोटे व्यापारियों के लिए 30-40 लाख रुपये का होम लोन पाना आसान हो जाएगा.

घर खरीदारों को सीधा फायदा क्या?

जब लोन पर सरकारी गारंटी जुड़ती है तो बैंकों का जोखिम कम हो जाता है, इसका मतलब है – ब्याज दरें थोड़ी प्रतिस्पर्धी हो सकती हैं, लोन रिजेक्शन की दर घटती है और डाउन पेमेंट का दबाव भी कुछ कम हो सकता है.

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मध्यमवर्गीय परिवार जो सालों से अपना घर खरीदने का इंतजार कर रहे थे, उनके लिए यह फैसला सपना साकार करने वाला साबित हो सकता है.

निष्कर्ष

अफोर्डेबल हाउसिंग क्रेडिट रिस्क गारंटी लिमिट को 40 लाख रुपये तक बढ़ाने का प्रस्ताव बढ़ती कीमतों के दौर में बहुत व्यावहारिक लगता है. यह न सिर्फ HFC को प्रोत्साहित करेगा बल्कि लाखों परिवारों के लिए अपना घर होना आसान बनाएगा.

अभी यह प्रस्ताव विचार के स्तर पर है. अंतिम फैसला आने पर और स्पष्टता मिलेगी. अगर आप होम लोन की प्लानिंग कर रहे हैं तो इस खबर पर नजर बनाए रखें.

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