बलिया में Sahara Investment Fraud का आरोप: 77,200 रुपये सहारा के नाम पर लिए, कागज दूसरी कंपनी के मिले

Ballia Sahara Investment Fraud: सहारा के नाम पर 77,200 रुपये लिए, दूसरी कंपनी के कागज देने का आरोप

बलिया में एक परिवार का भरोसा टूटने की कहानी सामने आई ह, सुखपुरा थाना क्षेत्र के करनई गांव निवासी रामेश्वर गुप्ता का आरोप है कि खरहाटार निवासी सुरेंद्र सिंह ने 2012 से 2015 के बीच Sahara company में ज्यादा मुनाफे का लालच देकर उनसे कुल 77,200 रुपये लिए. करीब दस साल बाद पैसे मांगने पर सहारा के कागज नहीं, बल्कि रियल सन राइज हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड के fixed deposit जैसे दस्तावेज दिए गए, यह आरोप है, अदालत का फैसला नहीं, अमर उजाला की 7 अक्टूबर 2026 की रिपोर्ट के मुताबिक पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर FIR दर्ज कर जांच शुरू कर दी है.

Sahara Investment Fraud

 

पैसा कैसे और कहां गया, पीड़ित का दावा

रामेश्वर गुप्ता ने अपर मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम की अदालत में प्रार्थना पत्र दिया है. उनके मुताबिक रकम अलग-अलग रास्तों से ली गई, उमाशंकर के SBI खाते में अलग-अलग किश्तों में 31 हजार रुपये भेजे गए. सुरेंद्र सिंह की पुत्री साक्षी के खाते में 8 हजार रुपये गए. नकद 35 हजार और 3,200 रुपये भी दिए गए, कुल जोड़ 77,200 रुपये बनता है.

यह रकम Sahara investment के नाम पर ली गई थी, छोटे शहरों और गांवों में सहारा का नाम सालों से भरोसे से जुड़ा रहा है. कई परिवारों ने बच्चों की पढ़ाई, शादी या बुढ़ापे के लिए वहीं पैसा रखा था, जब वही नाम लेकर कोई रकम ले ले और बाद में दूसरी कंपनी का कागज थमा दे, तो नुकसान सिर्फ रुपये का नहीं रहता, सालों की बचत और भरोसा दोनों डगमगा जाते हैं.

पैसे मांगने पर टालमटोल और धमकी का आरोप

करीब दस वर्ष बाद, 20 मई 2025 को रामेश्वर गुप्ता ने अपनी रकम वापस मांगी, आरोप है कि टालमटोल शुरू हो गई और मारपीट की धमकी भी दी गई. इसके बाद 29 जून 2025 को सुखपुरा थाने में शिकायत हुई.

थाने पर दोनों पक्षों की मौजूदगी में सुरेंद्र सिंह ने सहारा में जमा के कागज देने के बजाय रियल सन राइज हॉस्पिटैलिटी लिमिटेड के नाम से दो दस्तावेज दिए. एक 29 अगस्त 2013 का 51 हजार रुपये का और दूसरा 30 सितंबर 2014 का 26 हजार रुपये का. वादी का कहना है कि इन कागजों पर भी पैसे लौटाने का भरोसा दिया गया, लेकिन भुगतान नहीं हुआ, उनका आरोप है कि रकम सहारा में जमा नहीं कराई गई, किसी अन्य कंपनी में लगाई गई और फर्जी दस्तावेज दिए गए.

FIR क्यों देर से दर्ज हुई

पीड़ित का आरोप है कि थाने पर शिकायत के बावजूद तुरंत प्राथमिकी दर्ज नहीं हुई. इसीलिए उन्होंने कोर्ट में अर्जी देकर FIR और विवेचना की मांग की. थानाध्यक्ष रत्नेश दुबे ने कहा है कि न्यायालय के आदेश पर आरोपी के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है और मामले की जांच चल रही है.

यहां एक बात साफ रखनी जरूरी है, अभी ये आरोप हैं जांच पूरी होने और अदालत के फैसले तक किसी को दोषी मानना सही नहीं, दस्तावेज, बैंक स्टेटमेंट और दोनों पक्षों की बात जांच के दायरे में है.

निवेशकों को क्या सीखना चाहिए

इस तरह के investment fraud में अक्सर पुराना भरोसा, नकद लेनदेन और मौखिक वादा काम आता है. रसीद कंपनी के लेटरहेड पर हो, खाता उसी कंपनी का हो और स्कीम का नाम कागज पर वही लिखा हो जो मुंह से बताया गया था, ये तीन बातें मैच न करें तो रुक जाना चाहिए.

SEBI रजिस्टर्ड स्कीम, कंपनी का आधिकारिक पोर्टल और अपने बैंक खाते से सीधे भुगतान, ये साधारण कदम कई झांसे रोक देते हैं. पुराना पैसा वापस मांगते समय लिखित शिकायत, बैंक प्रूफ और गवाह का रिकॉर्ड साथ रखना बाद में कोर्ट और पुलिस दोनों में काम आता है.

बलिया का यह मामला छोटा आंकड़ा दिखता है, 77,200 रुपये, लेकिन गांव के एक परिवार के लिए यह सालों की जमा पूंजी हो सकती है. जांच आगे बढ़ेगी तो साफ होगा कि रकम सच में कहां गई और दस्तावेज असली थे या नहीं.

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