कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 आम गलतियां जो नई कार को महंगी बना देती हैं | RBI नियम और बचत के आसान तरीके

कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 आम गलतियां जो नई कार को महंगी बना देती हैं

कार खरीदना बुरी बात नहीं है, लेकिन जब बात लोन की आती है, तो कई लोग सिर्फ एक बात पर अटक जाते हैं, महीने की EMI कितनी होगी?

कार लोन लेते समय सिर्फ EMI न देखें: 5 आम गलतियां

डीलर मुस्कुराते हुए कम EMI बताता है, और हम खुश होकर साइन कर देते हैं. बाद में पता चलता है कि कुल ब्याज इतना ज्यादा हो गया कि कार की असली कीमत दोगुनी पड़ गई.

मैंने कई लोगों से बात की है जिन्होंने यही गलती की. आज उन्हीं अनुभवों और RBI के नए नियमों के आधार पर आसान भाषा में बता रहा हूं कि आप इन जालों से कैसे बच सकते हैं.

1. सिर्फ EMI देखकर फैसला मत करो – कुल लागत देखो

सबसे बड़ी गलती यही है, ₹12,000-15,000 की EMI सुनकर दिल खुश हो जाता है. लेकिन अगर लोन की अवधि 3 साल से 7 साल कर दी जाए, तो ब्याज कई लाख बढ़ जाता है.

हमेशा पूछो – कुल कितना पैसा वापस करना पड़ेगा? कम EMI लंबे समय में महंगी पड़ती है.

2. डीलर का पहला ऑफर तुरंत मत मानो

शोरूम में सुविधा के नाम पर एक बैंक का ऑफर दिखाया जाता है, लोग सोचते हैं – यहीं ठीक है.

सच्चाई यह है कि अलग-अलग बैंक और NBFC की ब्याज दर, प्रोसेसिंग फीस और अन्य चार्ज में फर्क होता है. 0.5% या 1% कम ब्याज भी 5 साल में हजारों रुपये बचा सकता है.

3. बहुत कम डाउन पेमेंट न करें

कम डाउन पेमेंट से शुरुआत आसान लगती है, लेकिन लोन की रकम बढ़ जाती है और ब्याज भी

एक्सपर्ट्स कहते हैं – इमरजेंसी फंड पूरा खत्म करके डाउन पेमेंट मत बढ़ाओ, संतुलन बनाओ. थोड़ा ज्यादा डाउन पेमेंट करके लोन छोटा रखना अक्सर फायदेमंद होता है.

4. हिडन चार्जेस और फाइन प्रिंट जरूर पढ़ें

ब्याज दर तो सब देखते हैं, लेकिन प्रोसेसिंग फीस, डॉक्यूमेंटेशन चार्ज, इंश्योरेंस से जुड़े खर्च और प्रीपेमेंट/फोरक्लोजर चार्ज अक्सर छिपे रहते हैं.

RBI के नियमों के अनुसार अब बैंक और NBFC को की-फैक्ट्स स्टेटमेंट (KFS) देना जरूरी है. इसमें APR (एनुअल परसेंटेज रेट), सभी फीस और पेनल्टी एक ही पेज पर साफ लिखी होती है. लोन फाइनल करने से पहले KFS की कॉपी जरूर मांगें और पढ़ें.

5. प्रीपेमेंट और फोरक्लोजर नियम पहले से जान लें

आज की नौकरी में 1-2 साल बाद बोनस या सैलरी बढ़ सकती है. आप लोन जल्दी चुकाना चाहें, तो पेनल्टी कितनी लगेगी?

फिक्स्ड और फ्लोटिंग रेट के नियम अलग होते हैं. पहले से जान लें कि पेनल्टी-फ्री प्रीपेमेंट का विकल्प है या नहीं.

कार का असली खर्च सिर्फ EMI नहीं होता

EMI के अलावा इंश्योरेंस, पेट्रोल/डीजल, सर्विसिंग, मेंटेनेंस और अचानक रिपेयर का खर्च भी जोड़ें. अगर EMI आपकी सैलरी का बड़ा हिस्सा खा लेती है, तो बाकी जरूरी खर्च और बचत मुश्किल हो जाती है.

अब लोन देने वाले को साफ-साफ बताना पड़ता है कि कुल लागत कितनी है.

कार लेना जरूरी है, लेकिन अपनी जेब को कमजोर करके नहीं, थोड़ा समय निकालकर ऑफर तुलना करें, KFS पढ़ें और कुल लागत कैलकुलेट करें. यही छोटी-छोटी बातें आपको सालों तक राहत देती हैं.

अगर आप अभी कार लोन सोच रहे हैं, तो इन 5 बातों को ध्यान में रखिए, आपकी नई गाड़ी खुशियां लाए, बोझ नहीं.

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