एथनॉल उत्पादन बढ़ाने की तैयारी: AM Green लगाएगी 5 बड़ी Bio-Refinery, निवेश 10,000 करोड़ से ज्यादा

भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है. ग्रीन एनर्जी कंपनी AM Green ने एथनॉल उत्पादन बढ़ाने के लिए 10,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बड़ा निवेश करने की घोषणा की है. कंपनी 2030 तक उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और मध्य प्रदेश समेत विभिन्न राज्यों में पांच बड़ी बायो-रिफाइनरी स्थापित करने की योजना पर काम कर रही है. यह खबर सिर्फ बिजनेस की नहीं, बल्कि किसानों, पर्यावरण और भारत के एनर्जी फ्यूचर से जुड़ी है.

AM Green की योजना क्या है?

AM Green, ग्रीन को ग्रुप के प्रमोटर्स अनिल चिलमलमशेट्टी और महेश कोली द्वारा स्थापित कंपनी है. इसके मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) एसएसवी रामाकुमार ने हाल ही में बताया कि कंपनी बायो-एथनॉल और उससे जुड़े अन्य ग्रीन प्रोडक्ट्स बनाने के लिए बड़ी बायो-रिफाइनरियों पर फोकस कर रही है.

एथनॉल उत्पादन बढ़ाने की तैयारी: AM Green

हर रिफाइनरी की शुरुआती क्षमता 2.5 लाख टन प्रति वर्ष (250 KTPA) रखी जाएगी, जिसे बाद में बढ़ाकर 10 लाख टन प्रति वर्ष (1 MTPA) तक पहुंचाया जा सकता है. रामाकुमार के अनुसार, आमतौर पर 250 KTPA क्षमता की हर यूनिट में 2,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश लगता है.

असम में पहले ही शुरू हो चुका काम

पिछले साल नवंबर में AM Green ने असम में देश की पहली बांस-आधारित बायो-रिफाइनरी का शुभारंभ किया था. लगभग 4,500 करोड़ रुपये की इस परियोजना का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किया था. यह प्लांट अब जल्द 65 प्रतिशत क्षमता उपयोग का लक्ष्य हासिल करने वाला है. यहां सेलोसिक (दूसरी पीढ़ी का) एथनॉल बन रहा है, जो पारंपरिक एथनॉल से कहीं ज्यादा पर्यावरण-हितैषी है.

किन राज्यों में और क्या होगा?

उत्तर प्रदेश: चीनी उद्योग से जुड़े फीडस्टॉक (शीरा नहीं) पर आधारित प्लांट.

आंध्र प्रदेश: श्रीकाकुलम, विजयनगरम और अनाकापल्ली जैसे जिलों में, यहां फसल उगाने के लिए भी जमीन तलाशी जा रही है.

मध्य प्रदेश: बांस, चावल-गेहूं का भूसा या इंडियन नेपियर घास पर आधारित.

ये प्लांट 2G ethanol बनाएंगे, जो गैसोलीन के कार्बन फुटप्रिंट को 80 प्रतिशत तक कम कर सकता है. पहली पीढ़ी का एथनॉल सिर्फ 50 प्रतिशत तक कम करता है. साथ में ग्रीन फरफ्यूरल और एसिटिक एसिड जैसे प्रोडक्ट भी निकलेंगे.

किसानों और पर्यावरण के लिए क्या फायदा?

यह निवेश सिर्फ फैक्ट्री लगाने का नहीं है, बायो-वेस्ट (फसल का अवशेष) और खास फसलों का इस्तेमाल होगा. इससे किसानों को अतिरिक्त आय का मौका मिलेगा और पराली जलाने जैसी समस्या भी कम होगी. भारत के ethanol blending लक्ष्य (20 प्रतिशत) को पूरा करने में भी मदद मिलेगी. साथ ही sustainable aviation fuel और ग्रीन केमिकल्स की दिशा में रास्ता खुलेगा.

रामाकुमार, जो पहले इंडियन ऑयल में रिसर्च एंड डेवलपमेंट डायरेक्टर रह चुके हैं, कहते हैं कि पिछले एक साल में फीडस्टॉक टेस्टिंग अच्छी चली है और जल्द जमीन मिलने की उम्मीद है.

क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?

भारत आज दुनिया के सबसे बड़े green energy बाजारों में से एक बन रहा है. AM Green जैसी कंपनियां bio-refinery और low-carbon fuel पर काम करके न सिर्फ कार्बन एमिशन घटा रही हैं, बल्कि रोजगार और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूत कर रही हैं.

अगर आप स्वच्छ ऊर्जा, एथनॉल ब्लेंडिंग या ग्रीन इन्वेस्टमेंट की खबरें फॉलो करते हैं, तो यह अपडेट जरूर ध्यान देने लायक है. भारत की ऊर्जा आजादी और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐसे कदम लगातार बढ़ रहे हैं.

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